
चरण VI
CONVENTUS
CONVENTUS — यह वापसी है। नए स्वयं की ओर नहीं। वास्तविकता की ओर। सभी भाग — और मजबूत, और कमजोर, और उज्ज्वल, और अंधेरे — एक ही मेज पर इकट्ठा होते हैं। यहाँ कोई निर्वासित नहीं है। यहाँ सभी के लिए स्थान है।
तुम अपने आप से लड़ना बंद कर देते हो। तुम स्वीकार करते हो कि तुम विभिन्न हो सकते हो। थके हुए और मजबूत। क्रोधित और न्यायपूर्ण। डरे हुए और साहसी। और यह विरोधाभास नहीं है, बल्कि एकता है।
यहाँ तुम अपने लिए सब कुछ माफ कर देते हो, जिसके लिए तुमने खुद को दोषी ठहराया। तुम तीन वादे करते हो — बिना 'करना है', 'मैं चुनता हूँ' के साथ। और तुम अपना संविधान बनाते हो — जीवन के 5 नियम। न थोपे गए। तुम्हारे।